भगवन श्री राम के दरवार में लवकुश सीता माता की कठिन एवं दुखी अवस्था को इस गीत से परिचय कराते है : "जनक दुलारी को वधु दशरथ की ,राज रानी होके भी दिन वन में बिताती हे " इस गीत को आप निम्न लिंक पर जाकर देख सकते है
रामयण के प्रमुख भजन और गीत ,में आपसे शेयर करने जा रहा हु। अत्यंत भावनात्मक भजन में प्रमुख है लवकुश का गान , "अवध में ऐसा ,ऐसा एक दिन आया ,निष्कलंक सीता को प्रजा ने मिथ्या दोष लगाया "
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